काम चालू होने से कॉर्पोरेट की बढ़ी दिक्कतें, लेबर्स को वापस बुलाने के लिए शुरू किया गया इंसेंटिव ऑफर और अन्य सुविधाएं

  • रियल एस्टेट में 52 प्रतिशत कामगारों की कमी
  • हेल्थकेयर एवं फार्मा में 42 प्रतिशत लेबर्स की कमी

दैनिक भास्कर

Jun 09, 2020, 02:32 PM IST

मुंबई. अनलॉक एक के तहत इस हफ्ते से शुरू हुई गतिविधियों के कारण कॉर्पोरेट इंडिया को बड़े पैमाने पर कामगारों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट में 52 प्रतिशत कामगारों की कमी है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 44 प्रतिशत लोगों की कमी है जबकि हेल्थकेयर और फार्मास्यूटिकल्स में 42 प्रतिशत की कमी है। यह जानकारी टीमलीज के एक सर्वे में सामने आई है। इस वजह से अब कामगारों के लिए इंसेंटिव ऑफर्स और अन्य सुविधाओं की पेशकश की जा रही है

टीमलीज ने कई आधार पर किया सर्वे

टीमलीज ने यह सर्वे शुरुआती भर्ती, पूछताछ और अन्य आधार पर किया है। सर्वे के मुताबिक उद्योगों में कंपनियों को श्रमिकों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। कई उद्योग तो श्रमिकों को लुभाने के लिए इंसेंटिव भी ऑफर कर रहे हैं। स्टाफिंग फर्म टीमलीज सर्विसेज के सर्वेक्षण के अनुसार, दो महीने से अधिक लॉकडाउन के दौरान अधिकांश कामगारों ने अपनी आजीविका खो दी थी। इस वजह से देश भर के शहरों से प्रवासी श्रमिकों का बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हुआ। इससे कुछ महीनों में कामगारों की जरूरत में 40 से 50 प्रतिशत की कमी महसूस की गई।

आइसोलेशन की भी सुविधा दे रही हैं कंपनियां

कामगारों की कमी के चलते, फर्म अब आसपास के गांव या दूर दराज जाकर मजदूरों को लुभा रहे हैं। उन्हें अतिरिक्त मजदूरी, बोनस, भोजन, परिवहन सुविधाओं के साथ-साथ राज्यों में प्रवेश के लिए 15 दिन आइसोलेशन की सुविधाएं भी प्रदान करने का ऑफर दे रहे हैं। सर्वेक्षण के मुताबिक, ज्यादातर कामगारों के पलायन से इस समय मांग-आपूर्ति का अंतर अधिक है। उन्हें वापस बुलाना एक बड़ा काम है। इसके लिए हमें प्रवासी मजदूर भाइयों को अतिरिक्त काम करने के पैसे, बोनस, ज्यादा मजदूरी आदि इंसेंटिव ऑफर करना होगा।

कई सेक्टर्स ने शुरू की कामगारों की भर्ती

रिपोर्ट कहती है कि तेजी से आगे बढ़ रहे कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी), मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा एंड हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग, ईकॉमर्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर्स की कंपनियों ने हायरिंग शुरू कर दी है। मेंटेनेंस इंजीनियर, डिस्पैचर, लैब टेक्नीशियन, सिक्योरिटी गार्ड, सफाईकर्मी, पैकर्स, डिलिवरी स्टॉफ, स्टोरकीपर, ड्राइवर, टाइल फिक्सर्स, इलेक्ट्रीशियन और स्टोर एग्जिक्युटिव्स जैसे लोगों की इस समय सख्त जरूरत है।

डाबर इंडिया झारखंड और अन्य राज्यों से बुला रहा है कामगारों को 

डाबर इंडिया उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में अपनी इकाइयों के पास के क्षेत्रों में गांवों और कस्बों से श्रमिकों की भर्ती कर रहा है। डाबर एचआर के कार्यकारी निदेशक बिप्लब बक्सी ने कहा कि इसके अलावा, जहां भी हम कमी का सामना कर रहे हैं, हमने राज्य के अधिकारियों से अन्य राज्यों के कामगारों को भर्ती करने की अनुमति मांगी है और प्राप्त भी की है। झारखंड जैसे राज्यों में श्रमिकों की भर्ती करने के लिए कंपनी गई है। उन्होंने अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स तक पहुंचने के लिए ट्रांसपोर्टेशन की भी व्यवस्था की है।

हर राज्यों के प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है

बक्सी ने कहा कि परिवहन के दौरान प्रत्येक राज्य द्वारा जारी सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। एक बार जब कामगार हमारी मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों तक पहुंच जाते हैं तब भी इसका पालन हो रहा है। केईसी इंटरनेशनल जैसी कुछ फर्में प्रोत्साहनों पर विचार कर रही हैं। स्थानीय गैर प्रशिक्षित श्रमिकों को काम पर रखने और उन्हें प्रशिक्षण देने वाली पावर ट्रांसमिशन इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी के सीईओ विमल केजरीवाल ने कहा कि हम उन लोगों को प्रोत्साहन वेतन दे सकते हैं जो कुछ समय के लिए हमारे साथ रहने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

प्रवासी कामगारों पर निर्भर राज्यों को ज्यादा दिक्कत

विशेषज्ञों ने कहा कि श्रमिकों की कमी उन क्षेत्रों में ज्यादा है जो प्रवासी कामगारों पर अधिक निर्भर हैं। इसमें दक्षिण भारत के कई राज्यों का समावेश है। आदित्य बिड़ला ग्रुप में कार्बन ब्लैक बिजनेस के सीईओ संतृप्त मिश्रा ने कहा कि कामगारों की कमी लंबे समय तक नहीं रह सकती है। बहुत से लोग पहले से ही वापस आ रहे हैं। यदि उन्हें भुगतान नियमित रूप से किया जाता है तो और अधिक लोग काम पर वापस आ जाएंगे।

गांव गए ज्यादातर लोग शहरों में वापस आएंगे

मिश्रा का मानना है कि अपने गांवों में भागे ज्यादातर लोग आखिरकार शहरों में लौट आएंगे। इसके अलावा, भारत में युवा ज्यादा हैं, जो इंतजार कर रहे हैं कि कब शहरों में चलकर कामकाज शुरू किया जाए। कुछ उद्योगपतियों ने कहा कि उन लोगों की चिंताओं को शांत करना महत्वपूर्ण है जो शहरों से भागने के लिए मजबूर थे। आपको उनके दिल में वायरस के बारे में डर को दूर करने और उन्हें अपनी नौकरी वापस देने की जरुरत है।