कर्ज चुकाने के लिए दिल्ली का बिजली वितरण कारोबार बेचना चाहते हैं अनिल अंबानी, 8 निवेशकों ने खरीदने की इच्छा जताई

  • बीएसईएस राजधानी और बीएसईएस यमुना में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की 51% हिस्सेदारी
  • अगस्त 2018 में रिलायंस इंफ्रा ने मुंबई का बिजली कारोबार अडानी ट्रांसमिशन को बेचा था

दैनिक भास्कर

May 12, 2020, 02:46 PM IST

नई दिल्ली. अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले अनिल धीरुभाई अंबानी ग्रुप की कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर अपना राजधानी दिल्ली का बिजली वितरण कारोबार बेचना चाहती है। दिल्ली की बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल) और बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (बीवाईपीएल) में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्टर की 51-51 फीसदी हिस्सेदारी है। इस मामले से वाकिफ तीन सूत्रों के मुताबिक रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर इन दोनों कंपनियों में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचना चाहती है।

इन निवेशकों ने जताई खरीदने की इच्छा
इस मामले से वाकिफ सूत्रों के मुताबिक, इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर सीडीपीक्यू, एक्टिस एलएलपी और ब्रुकफील्ड एसेट मैनेजमेंट ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के इस बिजली वितरण कारोबार की खरीदने की इच्छा जताई है। इसके अलावा ग्रीनको एनर्जी होल्डिंग्स, इनेल ग्रुप, आई स्कावयर्ड कैपिटल, टोरंट पावर एंड वेड कैपिटल ग्रुप एलएलसी ने भी इस सौदे में रुचि दिखाई है। लाइव मिंट की रिपोर्ट के अनुसार रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्टर ने इस हिस्सेदारी के बेचने के लिए खरीदार तलाशने की जिम्मेदारी केपीएमजी को सौंपी है।

बीएसईएस राजधानी और यमुना के पास 44 लाख ग्राहक
राजधानी दिल्ली की प्रमुख बिजली वितरण कंपनियों में शुमार बीएसईएस राजधानी और बीएसईएस यमुना के पास करीब 4.4 मिलियन यानी 44 लाख ग्राहक हैं। राजधानी दिल्ली में 2002 में बिजली वितरण का निजीकरण किया गया था। तब दिल्ली का बिजली वितरण तीन कंपनियों बीआरपीएल, बीवाईपीएल और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड को सौंपा गया था। इन सभी कंपनियों में दिल्ली पावर लिमिटेड की 49 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके अलावा राजधानी दिल्ली में कैंट क्षेत्र में मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज और नई दिल्ली म्यूनिसिपिल कॉरपोरेशन बिजली वितरण का कार्य करती हैं।

कर्ज चुकाने के लिए बेची जा रही हिस्सेदारी
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर कर्ज कम करने के लिए संपतियों की बिक्री कर रही है। अगस्त 2018 में रिलायंस इंफ्रा ने मुंबई सिटी पावर डिस्ट्रीब्यूशन कारोबार अडानी ट्रांसमिशन को बेचा था। इस बिक्री से रिलायंस इंफ्रा को 18,800 करोड़ रुपए मिले थे। 8 मई को मार्च तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित करते समय रिलायंस इंफ्रा ने अगले वित्तीय वर्ष तक कंपनी को कर्जमुक्त बनाने का ऐलान किया था।