एनबीएफसी पेपर्स में म्यूचुअल फंड लगातार घटा रहे हैं निवेश, दो साल में 7 प्रतिशत तक घटाई हिस्सेदारी

  • मार्च 2018 में कुल हिस्सा 17.62 प्रतिशत था। मार्च 2020 में घटकर 10.52 प्रतिशत हो गया 
  • कमर्शियल पेपर्स  में 8.28 प्रतिशत और बांड में 9.34 प्रतिशत का निवेश किया गया था 

दैनिक भास्कर

May 16, 2020, 09:58 PM IST

मुंबई. पिछले कुछ सालों से गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में संकट की वजह से म्यूचुअल फंड भी अब उनका साथ छोड़ रहे हैं। पिछले दो साल में म्यूचुअल फंड कंपनियों ने एनबीएफसी में अपना हिस्सा 7 प्रतिशत तक घटा दिया है। मार्च 2018 में कुल हिस्सा 17.62 प्रतिशत था, जो मार्च 2020 में घटकर 10.52 प्रतिशत पर आ गया है।

मार्च 2018 में कुल निवेश 2,23,582 करोड़ रुपए था

आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2018 में एनबीएफसी में म्यूचुअल फंड ने 2,23,582 करोड़ रुपए का निवेश किया था। इसमें 1,05,094 करोड़ रुपए कमर्शियल पेपर्स (8.28 प्रतिशत) और बांड में 1,18,488 करोड़ रुपए (9.34 प्रतिशत) का निवेश किया था। यानी यह कुल निवेश का 17.62 प्रतिशत है। जून 2018 में फंड हाउसों ने कुल 2,33,995 करोड़ रुपए का निवेश किया था। इसमें से 1,27,950 करोड़ (9.52 प्रतिशत) कमर्शियल पेपर्स में जबकि 1,06,045 करोड़ (7.89 प्रतिशत) बांड में निवेश किया था। कुल निवेश का यह 17.41 प्रतिशत था।

मार्च 2019 में कुल निवेश 2,16,638 करोड़ रुपए था

इसी तरह दिसंबर 2018 में कुल निवेश 2,30,031 करोड़ रुपए का था। इसमें 1,14,331 करोड़ रुपए (8.54 प्रतिशत) कमर्शियल पेपर्स में निवेश किया गया था, जबकि 1,15,700 करोड़ रुपए (8.65 प्रतिशत) बांड में निवेश किया गया था। यह कुल निवेश का 17.19 प्रतिशत था। मार्च 2019 में फंड हाउसों ने एनबीएफसी में कुल निवेश 2,16,638 करोड़ रुपए का किया था। इसमें से 1,06,130 (8.13 प्रतिशत) करोड़ रुपए कमर्शियल पेपर्स में किया गया था जबकि 1,10,508 करोड़ रुपए (8.46 प्रतिशत) बांड में निवेश किया गया था। कुल निवेश का यह 16.59 प्रतिशत था।

जून 2019 में कुल निवेश 2,02,297 करोड़ रुपए था

जून 2019 में कुल निवेश 2,02,297 करोड़ रुपए (7.45 प्रतिशत) कमर्शियल पेपर्स में किया गया था जबकि 1,00,488 करोड़ रुपए (7.35 प्रतिशत) बांड में किया गया था। कुल निवेश का यह 14.80 प्रतिशत था। यानी 15 महीनों में म्यूचुअल फंडों ने एनबीएफसी में अपनी हिस्सेदारी 3 प्रतिशत से ज्यादा घटा दी थी।

सितंबर 2019 में म्यूचुअल फंड ने एनबीएफसी में कुल निवेश घटाकर 2 लाख करोड़ से नीचे कर लिया। कुल निवेश 1,87,214 करोड़ रुपए था। जिसमें से 92,115 करोड़ रुपए (6.76 प्रतिशत) कमर्शियल पेपर्स में निवेश किया गया था जबकि 95,099 करोड़ रुपए (6.98 प्रतिशत) बांड में किया गया था। यानी कुल निवेश 13.74 प्रतिशत रहा।

दिसंबर 2019 में निवेश गिर कर 1,64,834 करोड़ पर आ गया

दिसंबर 2019 में म्यूचुअल फंड का एनबीएफसी में कुल निवेश 1,64,834 करोड़ रुपए था। इसमें से 68,192 करोड़ रुपए (4.66) प्रतिशत कमर्शियल पेपर्स में था जबकि 96,642 करोड़ रुपए (6.6 प्रतिशत) बांड में निवेश किया गया था। कुल निवेश का यह 11.26 प्रतिशत हिस्सा था। मार्च 2020 में यह निवेश और घट गया। कुल निवेश घटकर 1,38,346 करोड़ रुपए पर आ गया। इसमें से 43,755 करोड़ रुपए (3.33 प्रतिशत) कमर्शियल पेपर्स में जबकि 94,591 करोड़ रुपए (7.19 प्रतिशत) निवेश बांड में किया गया था। यानी कुल निवेश की तुलना में एनबीएफसी में 10.52 प्रतिशत रह गया। यह दो साल पहले 17.62 प्रतिशत था।

एनबीएफसी के डिफॉल्ट होने से घटा निवेश

इस तरह से अगर देखा जाए तो एनबीएफसी के बांड में पिछले दो सालों में म्यूचुअल फंड ने अपना हिस्सा 9.34 प्रतिशत से घटाकर 7.19 प्रतिशत कर लिया। जबकि इसी अवधि में कमर्शियल पेपर्स में अपना हिस्सा 8.28 प्रतिशत से घटाकर 3.33 प्रतिशत कर दिया। यानी कमर्शियल पेपर्स में म्यूचुअल फंड को काफी दिक्कत हुई है। बता दें कि एस्सेल समूह, डीएचएफएल सहित कई एनबीएफसी के डिफॉल्ट होने से फंड हाउसों को काफी नुकसान हुआ है।