एच1 और एल1 वीजा को सस्पेंड करने से भारतीय आईटी कंपनियों को कोई फर्क नहीं, प्रतिबंध के बावजूद शेयरों में दिखा उछाल

  • चीन से 4 गुना से भी ज्यादा भारतीयों को जारी किए गए थे एच-1 वीजा
  • भारतीयों को पिछले साल एक लाख 31 हजार 549 वीजा जारी किए गए थे

दैनिक भास्कर

Jun 23, 2020, 02:42 PM IST

मुंबई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने विदेशियों को जारी होनेवाले एच-1बी और एल1 वीजा को सस्पेंड रखने का समय बढ़ा दिया। यह अब 31 दिसंबर तक लागू होगा। इसके मुताबिक 31 दिसंबर तक विदेशियों को ग्रीन कार्ड और एच-1बी वीजा जारी नहीं होगा। लेकिन इस सेक्टर में काम करनेवाले लोगों का मानना है कि इससे भारतीय आईटी कंपनियों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। क्योंकि आईटी सर्विसेस कहीं से भी की जा सकती है।

6 महीने के लिए ही प्रतिबंध लगा है वीजा पर 

अमेरिका और अन्य देशों के लिए वीजा मुहैया करानेवाले अभिनव इमिग्रेशन सर्विसेस के चेयरमैन अजय शर्मा कहते हैं कि यह फैसला महज 6 महीने के लिए है। लेकिन इसमें भी जो लोग वहां पर हैं उनको कोई फर्क नहीं पड़ता है। एच1 एल1 पर जो फैसला आया है वह उसके लिए लागू होगा जो नए लोग वहां जाना चाहते हैं। उनका कहना है कि कोविड-19 पहले से ही आवाजाही पर प्रतिबंध लगा चुका है और अभी भी इंटरनेशनल ट्रैवेलिंग बंद है। ऐसे में इसका कोई असर नहीं होगा।

आईटी कंपनियां कहीं से भी सेवा दे सकती हैं

अजय शर्मा कहते हैं कि जो भारतीय आईटी कंपनियां हैं वे सर्विस तो कहीं से भी दे सकती हैं। जिनके पास अमेरिकन क्लाइंट हैं, वे उन्हें कनाडा, यूके या यूरोप से सर्विस दे सकती हैं। साथ ही जो रेगुलर सर्विस है उसके लिए इसका कोई असर नहीं होगा। इसका थोड़ा सा असर केवल उन पर दिख सकता है जो नए प्रोजेक्ट होंगे। क्योंकि उसके लिए ट्रैवेलिंग करना जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि कोविड का असर तो पहले से ही है। लोगों की निर्भरता आईटी पर बढ़ गई है। अब जब वर्क फ्रॉम होम पूरी दुनिया में चल रहा है, तो यह नया प्रतिबंध किसी तरह का कोई असर नहीं डालेगा।

उनका कहना है कि टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल या टेक महिंद्रा जैसी कंपनियों का बेस कनाडा और यूके तथा यूरोप में भी है। ये वहां से अमेरिकन ग्राहकों को सेवा दे सकती हैं।

एयर ट्रैवेलिंग शुरू होने पर प्रतिबंध हट भी सकता है

वे कहते हैं कि हो सकता है कि जब एयर ट्रैवेलिंग शुरू होगी तो इस प्रतिबंध को घटा दिया जाएगा। पर यह एक शॉर्ट टर्म का मामला है। उनका कहना है कि एल वन पर जब जरूरत होती है तभी लोग जाते हैं। शार्ट टर्म में कोई इंपैक्ट नहीं होगा। सीएनआई रिसर्च के चेयरमैन किशोर ओस्तवाल कहते हैं कि इसका बहुत लिमिटेड इंपैक्ट हो सकता है। साइट डेवलपमेंट या प्रोजेक्ट पर थोड़ा इंपैक्ट हो सकता है। कुल मिलाकर कुछ एक लाख लोगों पर फर्क पड़ सकता है। इसमें एच 4 वाले भी हैं। इसके मुताबिक जो हाउसवाइफ हैं या बच्चे हैं वे काम करते हैं। और फिर सभी लोग आईटी में ही काम नहीं करते हैं।

कोविड की स्थिति ठीक होने पर यह प्रतिबंध दिसंबर से पहले भी हटा सकते हैं। इसका कोई असर नहीं हैं। यह बस चुनाव को देखते हुए एक राष्ट्रवादी फैसले तक सीमित है।

शेयर बाजार में पांचों आईटी कंपनियों के शेयर उछले

उन्होंने कहा कि ट्रंप के इस फैसले के बाद भी भारतीय शेयर बाजार में टॉप पांच आईटी कंपनियों के शेयरों में दिन भर उछाल देखा गया। दोपहर तक बीएसई पर टीसीएस का शेयर 0.23 प्रतिशत बढ़कर 2,033 रुपए पर कारोबार कर रहा था। जबकि विप्रो का शेयर 1.03 प्रतिशत बढ़कर 220 रुपए पर कारोबार कर रहा था। इंफोसिस का शेयर इसी समय 2.34 प्रतिशत बढ़कर 720 रुपए पर कारोबार कर रहा था जबकि एचसीएल का शेयर 1.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 577 रुपए पर कारोबार कर रहा था। टेक महिंद्रा का शेयर 0.52 प्रतिशत बढ़कर 551 रुपए पर कारोबार कर रहा था।

हर साल औसतन 85,000 जारी होता है एच-1 वीजा 

एच-1 बी वीजा पर नजर डालें तो अमेरिका 85,000 वीजा हर साल हाई स्किल्ड वर्कर्स को जारी करता है। यह वीजा 6 सालों के लिए रहता है। 2019 में 188,123 एच 1 वीजा जारी किया गया था। हालांकि इसमें रिन्यूअल वाले भी वीजा थे। इसमें से भारतीयों के लिए 131,549 वीजा जारी किए गए थे। जबकि चाइनीज नागरिकों के लिए 28,483 वीजा जारी किए गए थे। इस साल मई 2020 में केवल 143 एच-1 वीजा जारी किए गए थे। जबकि 2019 के मई में 13,367 वीजा जारी किए गए थे।

पिछले साल 18,354 भारतीयों को जारी किया गया था एल 1 वीजा 

एल1 वीजा की बात करें तो यह हाई लेवल और स्पेशिलाइज्ड कंपनी कर्मचारियों के लिए जारी किया जाता है। यह सात सालों तक के लिए होता है। 2019 में 76,988 वीजा जारी किया गया था। इसमें से 18,354 वीजा भारतीयों के लिए जारी किए गए थे। ब्रिटेन के लिए 5,902 वीजा जारी किए गए थे। आयरलैंड के लिए 5,295 वीजा जारी किए गए थे।