आरबीआई ने कोविड-19 से पैदा हुई आर्थिक स्थितियों पर की चर्चा, कर्ज के वन टाइम रिस्ट्रक्चरिंग की नहीं दी गई जानकारी

  • आरबीआई की बैठक में वन टाइम रिस्ट्रक्चरिंग की चर्चा पर उम्मीदें टिकीं थीं
  • वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बैंक के डायरेक्टर मीटिंग में शामिल हुए

दैनिक भास्कर

Jun 26, 2020, 09:38 PM IST

मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सेंट्रल बोर्ड ने शुक्रवार को अपनी बोर्ड मीटिंग में कोविड 19 महामारी से उत्पन्न मौजूदा आर्थिक स्थिति और उभरती चुनौतियों पर चर्चा की। आरबीआई ने अपनी वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि बोर्ड ने जुलाई 2019 से जून 2020 वित्त वर्ष के दौरान केंद्रीय बैंक की गतिविधियों पर भी चर्चा की।

वित्तमंत्री ने कर्ज के वन टाइम रिस्ट्रक्चरिंग पर बात करने की जानकारी दी थी

केंद्रीय बैंक ने कहा कि इसने जुलाई 2020 से शुरू होने वाले अगले एकाउंटिंग ईयर पर भी चर्चा की। यह एकाउंटिंग ईयर मार्च 2021 में समाप्त होगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के लोन के वन टाइम रिस्ट्रक्चरिंग की मांग पर चर्चा की या नहीं, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार आरबीआई से बात कर रही है। इसके तहत कोविड-19 महामारी से होने वाली परेशानी के कारण बैंकों को एकमुश्त कर्ज के पुनर्गठन की अनुमति दी जाए। इससे आरबीआई बोर्ड की बैठक में कर्ज के वन टाइम रिस्ट्रक्चरिंग की उम्मीदें लगाई जा रही थीं।

बैंक ने प्रेस रिलीज में कोई जानकारी नहीं दी

सीतारमण ने गुरुवार को कहा था कि हम आरबीआई के साथ बात कर रहे हैं। यह देखा जा सके कि क्या वन टाइम रिस्ट्रक्चरिंग हो सकती है। केंद्रीय बैंक की बोर्ड बैठक के बाद जारी रिलीज में सिर्फ इतना कहा गया कि अन्य नीतिगत और परिचालन मामलों पर चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता गवर्नर शक्तिकांत दास ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से की। इसमें आरबीआई के डिप्टी गवर्नर के अलावा टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन, टीमलीज के चेयरमैन मनीष सभरवाल और सन फार्मा के एमडी दिलीप सांघवी सहित कॉरपोरेट इंडिया के सेंट्रल बैंक के डॉयरेक्टर्स शामिल हुए।

बैठक में अन्य निदेशकों में अशोक गुलाटी, प्रसन्न कुमार मोहंती, सतीश मराठे, रेवती अय्यर, और सचिन चतुर्वेदी शामिल थे। आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव तरुण बजाज और वित्तीय सेवा विभाग के सचिव देबाशीष पंडा भी बैठक में शामिल हुए।