आरबीआई के 40 बीपीएस रेपो रेट घटाने से एफडी और बचत खाते पर घटेगी ब्याज, लोग अब दूसरे उत्पादों में करेंगे निवेश

  • एसबीआई की एफडी की दर मार्च में एक साल की अवधि के लिए 5.70 प्रतिशत थी
  • 2004 के बाद पहली बार एफडी की ब्याज दरें 6 प्रतिशत से नीचे आ गई हैं

दैनिक भास्कर

May 22, 2020, 12:18 PM IST

मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो और रिवर्स रेपो रेट में कटौती के बाद अब ग्राहकों द्वारा बचत खाते और एफडी में पैसा रखने का रुझान कम हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि आरबीआई के फैसले के बाद इन दोनों उत्पादों पर ब्याज कम हो जाएगी। ऐसे में ग्राहक अब वित्तीय बचत का दूसरा रास्ता अपना सकते हैं। साथ ही बैंकों को इस कटौती के बाद फंड की लागत भी घट जाएगी।

निचले स्तर पर पहुंच गई हैं एफडी और बचत खाते पर ब्याज दरें

इस मामले में एक बैंकर्स ने बताया कि पहले से ही एफडी और बचत खाते पर ब्याज दरें निम्न स्तर पर हैं। अब जब आरबीआई ने रेपो रेट में 40 बीपीएस की कटौती की है तो इससे ग्राहकों के कर्ज की किश्त भी घटेगी और उसके साथ एफडी और बचत खाते पर भी ब्याज दरें घटेंगी। इस बैंकर्स के अनुसार जब ग्राहकों को दिया जाने वाला कर्ज सस्ता होगा तो निश्चित तौर पर उनसे ली जाने वाली डिपॉजिट भी सस्ती होगी। ऐसे में कर्ज पर ब्याज दरें घटने के साथ ही एफडी और बचत पर भी ब्याज दरें घट जाएंगी।

अगले हफ्ते से बैंक करेंगे इस कटौती पर फैसला

एक अन्य बैंकर्स ने कहा कि हम अगले हफ्ते एएलएम यानी असेट लाइबिलिटी मैनेजमेंट की मीटिंग करेंगे और उसमें यह तय करेंगे कि कितना ब्याज दर कर्ज और एफडी पर घटाना है। इस बैंकर्स ने कहा कि रिटेल लोन पर ब्याज दरें कम होंगी। उसके साथ एफडी पर ब्याज दरें और बचत खाते पर ब्याज दरें अब 2.5 प्रतिशत तक जा सकती हैं। ऐसे में ग्राहक अब दूसरे संसाधनों में निवेश कर सकते हैं।

ग्राहक अब ऊंची ब्याज दरों वाले उत्पादों की ओर जाएंगे

एक विश्लेषक के मुताबिक जो ग्राहक एफडी और बचत खाते से ब्याज पर निर्भर थे, वे अब इसे छोड़कर कॉर्पोरेट बांड में या कंपनियों की डिपॉजिट का रास्ता अख्यितार कर सकते हैं। क्योंकि यहां अभी भी 7 प्रतिशत से ज्यादा की ब्याज दरें मिल रही हैं। इसी तरह से ग्राहक दूसरे साधन के रूप में म्यूचुअल फंड में एसआईपी कर सकते हैं जहां लंबी अवधि में 9 प्रतिशत तक का रिटन मिलना संभव है।

छोटी बचत वाली योजनाओं, म्युचुअल फंड में हो सकता है निवेश

यही नहीं, ज्यादातर ग्राहक अब सरकार की छोटी बचत योजनाओं जैसे ईपीएफ, किसान विकास पत्र, पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट और सुकन्या समृद्धि योजना आदि की ओर जा सकते हैं। क्योंकि यहां भी अभी अच्छी खासी ब्याज दरें मिल रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि कुछ ग्राहक बीमा के उत्पादों को पसंद कर सकते हैं। यहां भी बैंकों की तुलना में ज्यादा ब्याज दरें मिल रही हैं।

आरबीआई ने दूसरी बार घटाई दरें

बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार रेपो रेट में 40 बीपीएस की कटौती करने का ऐलान किया। लिहाजा अब रेपो रेट 4.40 से घटकर 4 प्रतिशत हो जाएगा। वहीं, रिवर्स रेपो रेट 3.75 प्रतिशत से घटाकर 3.35 प्रतिशत किया गया। लोन की किश्त चुकाने में छूट का समय 3 महीने और बढ़ाया, अगस्त तक फायदा मिलता रहेगा। आरबीआई गवर्नर ने यह भी बताया कि मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी के 6 में से 5 सदस्यों ने रेपो रेट घटाने के पक्ष में वोट दिया। कमेटी की बैठक 3 जून से होनी थी, लेकिन पहले ही कर ली गई। इसके पहले मार्च में भी रेपो रेट में 75 बेसिस प्वॉइंट की कटौती की गई थी। उस समय कई बैंकों ने एफडी और बचत खाते की ब्याज दरों में कटौती की थी।

मार्च में भी एफडी और बचत खातों पर घटी थीं ब्याज दरें
उस कटौती के बाद एसबीआई ने बचत खाते पर ब्याज दरों में 25 बीपीएस कटौती की थी जो 2.75 प्रतिशत हो गई थी। यह दर 15 अप्रैल से लागू है। प्राइवेट सेक्टर के आईसीआईसीआई बैंक ने बचत खाते पर 25 बीपीएस की कटौती की थी और यह 9 अप्रैल से लागू है। इसमें 50 लाख तक की जमा पर 3.25 प्रतिशत ब्याज की पेशकश थी। कोटक महिंद्रा बैंक ने अप्रैल मं दो बार बचत खातों की ब्याज दरों में कटौती की थी।

घरों को खरीदने की ओर हो सकता है रुझान

एनरॉक प्रॉपर्टी कंसलटेंट के मुताबिक इस कटौती से ग्राहकों का रुझान घरों के खरीदने की ओर हो सकता है। क्योंकि ब्याज दरें अब निम्न से निम्नतम स्तर पर आ गई हैं। आवास कर्ज पर ब्याज दरें इस समय 7.15 से 7.8 प्रतिशत है जो अब और नीचे जाएगी। इस कटौती से बैंक आनेवाले हफ्ते में ब्याज दरों में कटौती करना शुरू करेंगे।

एफडी की बात करें तो एसबीआई की एफडी एक साल में 5.70 प्रतिशत की ब्याज दर पर पहुंच गई थी। अगस्त 2004 के बाद यह पहली बार था जब एफडी की ब्याज दरें 6 प्रतिशत से नीचे आ गई हैं। अब यह उससे भी नीचे जाएंगी।