आरबीआई की गाइडलाइंस को लेकर बैंक दुविधा में, 6 महीने पहले लोन डिफॉल्ट करनेवाले अकाउंट को धोखाधड़ी मानें या नहीं मानें

  • एक बैंक ने रेड फ्लैग किया तो कंसोर्टियम के अन्य बैंकों पर पड़ता है दबाव
  • इस महीने में डीएचएफएल सहित कई कंपनियों को रेड फ्लैग किया जा चुका है

दैनिक भास्कर

Jun 23, 2020, 04:48 PM IST

मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक निर्देश को लेकर बैंक बड़ी दुविधा में हैं। दुविधा इस बात की है कि जिन लोन अकाउंट को छह महीने पहले संदेहास्पद माना गया था, उन्हें अब धोखाधड़ी वाला अकाउंट करार दिया जाए या नहीं। यदि बैंक इन कर्ज को धोखाधड़ी के रूप में क्लासीफाइ करते हैं, तब उन पर नरम रुख अपनाने का रिस्क बना रहेगा। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें एक वर्ष के अंदर उस लोन का प्रोविजन करना होगा। भले ही लोन का एक बड़ा हिस्सा वसूली होने जैसा हो।

पिछले साल ईडी ने बड़े पैमाने पर की थी कार्रवाई

पिछले साल प्रवर्तन अधिकारियों (ईडी) द्वारा बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई थी। आरबीआई अब बैंकों को इन लोन पर फैसला लेने के लिए जोर दे रहा है। पिछले साल बड़े खातों में से दो डीएचएफएलऔर रेलिगेयर हैं। रेड-फ्लैग अकाउंट कॉन्सेप्ट को आरबीआई ने बैंकों को अर्ली वार्निंग सिग्नल्स पर कार्रवाई करने के लिए पेश किया था, जिसमें रेग्युलेटरी और टैक्स अथॉरिटीज के छापे शामिल हैं।

रेड फ्लैग वाले खातों का 6 महीने में करना होता है फॉरेंसिक ऑडिट

एक बार जब किसी खाते को रेड फ्लैग दिखाया जाता है, तो बैंकों को छह महीने के भीतर अपना फॉरेंसिक ऑडिट पूरा करना होता है। यह भी तय करना अनिवार्य है कि यह धोखाधड़ी (fraudulent) है या नहीं। धोखाधड़ी के रूप में डालने का मतलब होगा कि जून तिमाही में बैंकों का प्रदर्शन बुरी तरह गिरेगा। इससे यह भी झूठा साबित होगा कि अप्रैल-जून तिमाही में कोविड-19 के चलते मोराटोरियम से डिफ़ॉल्ट करने वालों की संख्या नहीं बढ़ेगी।

पिछले साल भूषण पावर में हुआ था ऐसा मामला 

बैंकों को पिछले साल जैसा डर लग रहा है। पिछले साल सभी कर्जदाताओं को पंजाब नेशनल बैंक की कार्रवाई के बाद भूषण पावर एंड स्टील को धोखाधड़ी के रूप में क्लासीफाइ करने के लिए मजबूर किया गया था। डीएचएफएल के कर्ज के कंसोर्टियम में 20 से अधिक बैंक हैं। आधे बैंकों ने कंपनी को अपने कर्ज को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत (classified) किया है, जबकि आधे ने ऐसा नहीं किया है।

एसबीआई ने पिछले साल किया था रेड फ्लैग 

केपीएमजी द्वारा फॉरेंसिक ऑडिट के बाद सभी कर्जदाताओं ने पिछले साल डीएचएफएल खाते को रेड फ्लैग दिखाया था। हालांकि, एसबीआई ने आगे बढ़कर इस साल के शुरू में लोन को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत किया था। जिसके बाद कई अन्य बैंकों ने किया था। इस महीने की शुरुआत में कर्नाटक बैंक ने एक्सचेंजों को बताया था कि उसने डीएचएफएल, रेलिगेयर फिनवेस्ट और कुछ अन्य उधारकर्ताओं को धोखाधड़ी खातों के रूप में वर्गीकृत किया है।

बैंकों के आईटी प्लेटफॉर्म पर किया जाता है रेड फ्लैग 

इसी तरह कई अन्य खातों के ऐसे उदाहरण हैं जहां कंसोर्टियम के एक सदस्य ने इसे धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत किया है। रेड फ्लैग इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म पर किया जाता है जहां सभी बैंक या संस्थानों के लिए एक जोखिम की रिपोर्टिंग की जाती है, ताकि अन्य बैंकों को धोखाधड़ी के जोखिम के बारे में आगाह किया जा सके। इससे कंसोर्टियम के अन्य बैंकों पर भी फ्रॉड की रिपोर्ट करने का दबाव पड़ता है।

बैंकर्स के मुताबिक सुधार की है जरूरत

बैंकरों का कहना है कि धोखाधड़ी के लिए पैमाने में सुधार की जरूरत है। उदाहरण के लिए डीएचएफएल के मामले में बैंकों का कहना है कि रिटेल लोन बिजनेस के लिए कई खरीदार हैं, जो अभी भी आरबीआई द्वारा नियुक्त मैनेजमेंट के तहत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक के सीईओ ने कहा कि अगर कारोबार को बचाने की कोशिश करते हुए प्रमोटर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाती है तो जमाकर्ता का उद्देश्य पूरा किया जा सकता है।