आईडीबीआई म्यूचुअल फंड पर सेबी ने लगाया 90 लाख रुपए का सेटलमेंट चार्ज, बिल्ट में निवेश के नियमों का हुआ था उल्लंघन

  • बिल्ट की सब्सिडियरी कंपनी के सीपी को किया गया था डाउनग्रेड
  • आईडीबीआई एएमसी ने ड्यू डिलिजेंस को पूरा नहीं किया था

दैनिक भास्कर

Jun 01, 2020, 07:03 PM IST

मुंबई. पूंजी बाजार नियामक सेबी ने आईडीबीआई म्यूचुअल फंड की मैनेजमेंट कंपनी आईडीबीआई असेट मैनेजमेंट लिमिटेड और ट्रस्टी कंपनी आईडीबीआई एमएफ ट्रस्टी कंपनी पर 90 लाख रुपए का सेटलमेंट चार्ज लगाया है। यह चार्ज बल्लारपुर इंडस्ट्रीज लिमिटेड (बिल्ट) में निवेश को लेकर नियमों के उल्लंघन के आरोप में लगाया गया है।

सब्सिडियरी ने मैच्योरिटी का भुगतान नहीं किया

सेबी ने सोमवार को जारी सर्कूलर में कहा कि 23 फरवरी 2017 को क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग एंड रिसर्च ने बिल्ट की रेटिंग डाउनग्रेड कर दी थी। इस बारे में जब सेबी ने जांच की तो पता चला कि आईडीबीआई का बिल्ट द्वारा जारी सिक्योरिटीज में कोई निवेश नहीं था। हालांकि बिल्ट की दूसरी सब्सिडयरी बिल्ट ग्राफिक्स पेपर प्रोडक्ट द्वारा जारी कमर्शियल पेपर्स (सीपी) में कुछ स्कीम्स का निवेश था। यह सीपी 31 जनवरी 2017 को मैच्योर हो गई थी। पर इस सब्सिडियरी ने मैच्योरिटी का भुगतान नहीं किया।

सेबी ने 2018 में तीन बार जांच की 

सेबी ने कहा कि 4-5 जनवरी 2018, 9-11 जनवरी 2018, 19-19 जनवरी 2018 को उसने आईडीबीआई म्यूचुअल फंड की जांच की थी। सेबी ने जांच में पाया कि आईडीबीआई म्यूचुअल फंड कंपनी नियमों को पूरा नहीं कर पाई थी। सेबी ने कहा कि असेट मैनेजमेंट कंपनी म्यूचुअल फंड रेगुलेशन के कंप्लायंस की निगरानी करने में विफल थी। इसने ड्यू डिलिजेंस को लेकर कोई एक्सरसाइज नहीं की। साथ ही इसने निवेश के फैसले पर भी कुछ नही किया। यही नहीं, मंजूर निवेश की नीतियों का भी पालन नहीं किया।

कई तरह से नियमों का उल्लंघन किया गया

सेबी ने जांच में पाया कि असेट मैनेजमेंट कंपनी ने बिल्ट की सब्सिडियरी में इनवेस्टमेंट कमिटी के भी फैसलों को नहीं समझ पाया। इन हाउस सिस्टम क्रेडिट रिस्क असेसमेंट और ड्यू डिलिजेंस को पूरा नहीं किया। इसी तरह चेक एंड बैलेंस सिस्टम का भी सही उपयोग नहीं किया गया और इससे निवेश के फैसले गलत साबित हुए। सेबी ने कहा कि असेट मैनेजमेंट कंपनी निवेश के वैल्यूएशन में विफल रही और साथ ही उसने एनपीए प्रोविजनिंग को लागू किया जो स्पष्ट रूप से म्यूचुअल फंड के रेगुलेशन के नियमों के मुताबिक लागू नहीं हो सकता है।

वैल्यूएशन कमिटी भी इसमें विफल रही

सेबी ने कहा कि वैल्यूएशन कमिटी बिल्ट के डिफॉल्ट पर कोई मीटिंग नहीं की और ना ही कोई चर्चा की। जो वैल्यूएशन पॉलिसी अपनाई गई थी वह पूरी तरह से सही नहीं थी। उसके प्रोसीजर और उसकी व्याख्या भी सही नहीं है। सेबी ने इस तरह के कई आरोप असेट मैनेजमेंट कंपनी पर लगाए हैं। सेबी ने कहा कि इसी तरह आईडीबीआई एमएफ ट्रस्टी ने भी कुछ नियमों का पालन नहीं किया। यह एएमसी के ड्यू डिलिजेंस को पूरा नहीं किया। साथ ही वैल्यूएशन पॉलिसी को भी पूरा नहीं किया।

पिछले साल सेटलमेंट की बात शुरू हुई थी

सेबी ने सर्कूलर में कहा कि 25 नवंबर 2019 को आईडीबीआई ने सेबी की नोटिस के बाद सेटलमेंट करने का प्रस्ताव रखा। उसने सेटलमेट अप्लीकेशन फाइल किया। सेबी ने अपनी आंतरिक मीटिंग के बाद सेटलमेंट का फैसला लिया। इस फैसले के मुताबिक आईडीबीआई म्यूचुअल फंड पर 90,47,228 रुपए का सेटलमेंट चार्ज लगाया गया। आईडीबीआई ने 4 मई को इसका भुगतान कर दिया।