अडानी को मिला दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पावर प्लांट प्रोजेक्ट; 45300 करोड़ रुपए का निवेश कर अडानी ग्रीन 8,000 मेगावाट का प्लांट स्थापित करेगी

  • अडानी एनर्जी के इस नए प्रोजेक्ट से 4 लाख नौकरियों के जनरेट होने की उम्मीद है
  • 2 गीगावॉट की सोलर सेल और मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 2022 तक स्थापित की जाएगी

दैनिक भास्कर

Jun 09, 2020, 05:47 PM IST

मुंबई. अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) से मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े सोलर एग्रीमेंट को हासिल किया है। इसके तहत अडानी ग्रीन एनर्जी सौर परियोजनाओं के 8,000 मेगावाट (8 गीगावॉट) का विकास करेगी। यह दुनिया का सबसे बड़ा पावर प्लांट प्रोजेक्ट होगा। इसमें 45,000 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा।

2025 तक दुनिया की सबसे बड़ी रिन्यूएबल कंपनी बनने में मदद मिलेगी

इस कमिटमेंट के चलते अडानी अतिरिक्त 2 गीगावॉट सोलर सेल के निर्माण के साथ अपनी मॉड्यूल निर्माण क्षमता बढ़ा सकेगी। इससे 4,00,000 डायरेक्ट और इनडायरेक्ट नौकरियां पैदा होंगी। यह 90 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड को भी विस्थापित (डिस्प्लेस) करेगा। इस अवॉर्ड के साथ अडानी ग्रीन एनर्जी की अब परिचालन, निर्माण या अनुबंध के तहत 15 गीगावाट की क्षमता होगी। इससे 2025 तक दुनिया की सबसे बड़ी रिन्यूएबल कंपनी बनने की दिशा में यह तेजी से आगे बढ़ेगी।

5 सालों में 112,000 करोड़ रुपए के निवेश की संभावना

यह अवार्ड कंपनी को 2025 तक 25 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी की स्थापित उत्पादन क्षमता हासिल करने के अपने लक्ष्य के करीब ले जाएगा। इसके बदले में वह अगले 5 वर्षों में इस क्षेत्र में 112,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्म निर्भर भारत अभियान (Self Reliant India Program) की शुरुआत के बाद से यह अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। यह भारत में जलवायु परिवर्तन से जूझने में दुनिया का नेतृत्व जारी रखेगा।

प्रधानमंत्री के कमिटमेंट को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण कदम

2015 में पेरिस में सीओपी 21 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने कहा कि आज की दुनिया में जलवायु को आर्थिक विकास प्राथमिकताओं से स्वतंत्र नहीं माना जा सकता है। रोजगार निर्माण के साथ-साथ डि-कार्बोनाइजेशन का एक साझा उद्देश्य होना चाहिए।

आत्मनिर्भर भारत अभियान को सक्षम करने की दिशा में यह कदम है

भारत ने पेरिस में 2015 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में कमिटमेंट किया था कि वह जलवायु परिवर्तन क्रांति का नेतृत्व करेगा। आज भारत अपने COP-21 के कमिटमेंट को पूरा करने के लिए आठ देशों के बीच लीडर बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि यह अवार्ड जलवायु परिवर्तन के वादे में दुनिया के साथ-साथ हमारे देश के आत्म निर्भर भारत अभियान को सक्षम करने की दिशा में एक और कदम है।

8 गीगावॉट की परियोजनाओं को 5 सालों में लागू किया जाएगा

8 गीगावॉट की इन परियोजनाओं को अगले पांच वर्षों में लागू किया जाएगा। उत्पादन क्षमता का पहला 2 गीगावाट 2022 तक ऑनलाइन आएगा। बाकी की 6 गीगावॉट क्षमता 2025 तक 2 गीगावाट वार्षिक दर से उत्पादित की जाएगी। इन परियोजनाओं में विभिन्न स्थान शामिल होंगे, जिनमें 2 गीगावाट सिंगल साइट उत्पादन परियोजना शामिल है जो विश्व स्तर पर घोषित सबसे बड़ी सिंगल साइट परियोजना है।

2 गीगावॉट की सोलर सेल और मॉड्यूल मैनुफैक्चरिंग क्षमता 2022 तक स्थापित की जाएगी। मौजूदा 1.3 गीगावाट क्षमता के साथ भारत की सबसे बड़ी सोलर मैनुफैक्चरिंग फैसिलिटी के रूप में समूह की स्थिति को और मजबूत करेगी।